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हरविन्द्र कल्याण ने कहा- संवाद हमारी संस्कृति का आधार होने के साथ लोकतंत्र की आत्मा भी है

चंडीगढ़
हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा है कि संवाद हमारी संस्कृति का आधार होने के साथ लोकतंत्र की आत्मा भी है। उन्होंने युवाओं से विकसित भारत में अपनी भूमिका तय करने का आह्वान किया है। कल्याण हरियाणा विधान सभा में राजधानी युवा संसद की ओर से आयोजित हरियाणा युवा संवाद के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया। इस दौरान ग्रामीण हरियाणा में डिजिटल विभाजन को पाटने और महिलाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा व वित्तीय सहायता में सरकारी कल्याण योजनाओं तक आसान डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करने संबंधी विषयों पर गंभीर चर्चा हुई।

हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि इस युवा संवाद में लिए गए दोनों ही विषय बहुत महत्वपूर्ण है। इन पर युवा विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुति दी है। पूरक प्रश्नों के जवाब इतने सटीक और त्वरित थे कि ऐसा लगा जैसा असली में ही विधान सभा का बजट सत्र चल रहा हो। संवेदनशील विषयों को गंभीरता से रखा गया और इस दौरान सत्र की तरह ही शेरो-शायरी भी हुई।

इस महान सदन में प्रदेश का भविष्य तय होता है, नीतियां बनती हैं, विकास का खाका तैयार होता है। योजनाओं को धरातल पर लाने के लिए बजट पारित किया जाता है। उसके बाद बजट के खर्च की समीक्षा भी की जाती है। प्रदेश के इन सभी विषयों पर चर्चा होती है। सीएजी की रिपोर्ट इत्यादि की समीक्षा की जाती है। युवा विद्याथियों को इस महान सदन में इस प्रकार से चर्चा का मौका मिलना बहुत सौभाग्य की बात है।

उन्होंने कहा कि हम सबका उद्देश्य चर्चा के माध्यम से समस्याओं का समाधान, निष्कर्ष और निर्णय लेना है। इन सभी का केंद्र बिन्दु संवाद है। इस कार्यक्रम के दौरान अच्छा संवाद हुआ है। संवाद हमारी प्राचीन संस्कृति का हिस्सा है। यहां बड़े-बड़े विषयों पर फैसला लेने से पहले संवाद किया जाता था। यह प्रथा आज भी हमारे घरों में जारी है, जिसमें सभी परिजन बैठ कर निर्णय लेते हैं। मोहल्ले के विषयों पर अनेक घर तो गांव के विषयों पर गांव की पंचायत निर्णय लेती है। इसी प्रकार प्रदेश के विषयों पर विधान सभा में और देश के विषयों पर संसद चर्चा करती है। संवाद का कोई भी मंच हो सकता है। अदृश्य मंच से भी संवाद हो सकता है। सोशल मीडिया भी इसका एक माध्यम है।

हमें यह ध्यान रखना होगा कि संवाद सही दिशा में आगे बढ़ रहा है या नहीं। इसके लिए सबसे जरूरी है मर्यादा। विषयों पर फोकस रखना जरूरी है। पक्ष और विपक्ष दोनों की चर्चा से ही कोई निष्कर्ष निकलता है। हमें एक दूसरे की बातों को स्वीकार करने का भाव रखना होगा।

हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के साथ-साथ सबसे प्राचीन लोकतंत्र भी है। विधान मंडल में हमारे लोकतंत्र की आत्मा है। विधान पालिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका और चौथा स्तंभ माने जाने वाले मीडिया की अपनी भूमिका है। इन सबमें विधानपालिका की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन नेशन-वन लेजिस्लेशन का सपना देखा है। हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कृत्रिम सूचना आधारित तकनीक से डाटा का डिजिटलाइजेशन करेंगे। गत दिनों पटना में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के सम्मलेन में विधायिका के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने का निर्णय हुआ है। शहरी निकाय, पंचायती राज संस्थाओं के भी सम्मेलन होंगे। युवा और महिलाओं को अवसर देने के लिए प्रयास होंगे। इसके लिए विद्यार्थियों के भी सम्मेलन होंगे।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने विश्वास जताया था कि देश की जनता सेवा भाव वाला अच्छा नेतृत्व तैयार करती रहेगी। आज हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस अवसर पर राजधानी युवा संसद के सह संस्थापक एडवोकेट जय सैनी और एडवोकेट ईशा कपूर ने कार्यक्रम के सभी प्रतिभागियों का आभार जताया।

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