
नई दिल्ली
राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा पूरी हो चुकी है। लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित हो चुका है। इंडिया गठबंधन इस संशोधन विधेयक के विरोध में है। गुरुवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्टी के सांसद नसीर हुसैन ने कहा कि वक्फ़ संशोधन विधेयक मुसलमानों के खिलाफ है। JPC में विपक्षी सदस्यों द्वारा की गई किसी भी सिफारिश को वक्फ़ संशोधन विधेयक में शामिल नहीं किया गया ।
संजय राउत ने बीजेपी पर कसा तंज – संजय राउत ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि दो दिनों से मुस्लिमों की इतनी चिंता की जा रही है, जितनी जिन्ना ने भी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों की इतनी चिंता हो रही है कि मुस्लिम और हिंदू दोनों डरे हुए हैं। संजय राउत ने कहा कि ये बिल लोगों का ध्यान भटकाने का तरीका है। कल ही ट्रंप ने टैरिफ लगाया, उस पर चर्चा होनी चाहिए थी लेकिन आप ध्यान भटकाने के लिए ये बिल ले आए। उन्होंने कहा कि बीजेपी को मुस्लिमों की चिंता कबसे होने लगी? अब आप मुस्लिमों की संपत्ति की चिंता कर रहे हो।
यह ऐतिहासिक क्षण, हाशिए पर पड़े लोगों को मदद मिलेगी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसद में वक्फ संशोधन विधेयक का पारित होना एक "महत्वपूर्ण क्षण" है. पीएम ने कहा कि यह मुस्लिम समुदाय में हाशिए पर पड़े लोगों को आवाज़ देगा और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता को बढ़ावा देगा.
वक्फ विधेयक, जो सरकार को वक्फ संपत्तियों को विनियमित करने का अधिकार देता है उसे संसद में दो दिन तक चली मैराथन बैठक बैठक के बाद आधी रात को पारित कर दिया गया.
बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के लिए थाईलैंड पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "संसद द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक का पारित होना हमारे साझा सामाजिक-आर्थिक न्याय, पारदर्शिता और समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ है. इससे विशेष रूप से उन लोगों को मदद मिलेगी जो लंबे समय से हाशिये पर रहे हैं और इस प्रकार उन्हें आवाज और अवसर दोनों से वंचित रखा गया है."
इससे बढ़ेगी पारदर्शिता
प्रधानमंत्री का बयान भाजपा के उस रुख को दर्शाता है जिसमें पार्टी ने इस विधेयक को गरीब मुस्लिमों के लिए एक सुधारात्मक कदम बताया है—खासतौर पर उन लोगों के लिए जिनकी समुदाय के मामलों में कोई भागीदारी नहीं रही. प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि वक्फ प्रणाली दशकों से पारदर्शिता की कमी का पर्याय बन गई है, जिससे गरीब मुसलमानों, महिलाओं और पसमांदा मुसलमानों के हितों को नुकसान पहुंच रहा है.
पीएम ने लिखा, 'वक्फ व्यवस्था दशकों से अधिकारहीनता और अपारदर्शिता का प्रतीक रही है. इससे मुस्लिम महिलाओं, गरीब मुस्लिमों और पसमांदा मुस्लिमों के हितों को नुकसान हुआ है. यह नया कानून पारदर्शिता बढ़ाएगा और लोगों के अधिकारों की रक्षा करेगा.'
पसमांदा मुस्लिम समुदाय के भीतर सबसे पिछड़े और सामाजिक रूप से शोषित वर्ग माने जाते हैं. हाल के वर्षों में भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी ने "अनदेखे" पसमांदा मुस्लिमों को जोड़ने की कोशिश की है.
सामाजिक न्याय के प्रति संवेदनशील युग की शुरूआत होगी- पीएम
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विधेयक, जिसे अब कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता है, आधुनिकता और सामाजिक न्याय के प्रति संवेदनशीलता के एक नए युग की शुरुआत करेगा. पीएम ने कहा, 'हम प्रत्येक नागरिक की गरिमा को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. इसी सोच से हम एक मजबूत, समावेशी और उदार भारत का निर्माण करेंगे."
विधेयक के अनुसार, वक्फ परिषद में दो महिला सदस्यों सहित अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य होने चाहिए. इसके अलावा, जिला कलेक्टरों के पद से ऊपर के वरिष्ठ अधिकारियों का अब अंतिम निर्णय होगा कि कोई संपत्ति वक्फ है या सरकार की है.
Waqf Amendment Bill पर अमित शाह ने क्या कहा?
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह वक्फ पर प्रस्तावित कानून नहीं मानने की धमकी दे रहा, लेकिन यह संसद द्वारा पारित किया गया कानून होगा और इसे सभी को स्वीकार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति के लिए यह डर फैलाया जा रहा है कि वक्फ विधेयक मुसलमानों के धार्मिक मामलों और उनके द्वारा दान की गई संपत्तियों में दखल है। वहीं, राहुल गांधी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने और उनके निजी कानूनों और संपत्ति के अधिकारों को हड़पने के उद्देश्य से बनाया गया एक हथियार है। उन्होंने कहा कि आरएसएस, भाजपा और उनके सहयोगियों द्वारा संविधान पर यह हमला आज मुसलमानों पर लक्षित है, लेकिन भविष्य में अन्य समुदायों को निशाना बनाने के लिए एक मिसाल कायम करता है। कांग्रेस पार्टी इस कानून का कड़ा विरोध करती है क्योंकि यह भारत के मूल विचार पर हमला करता है और अनुच्छेद 25, धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है।