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हरियाणा में सरकारी स्कूलों में ड्रॉप आउट बच्चों का बढ़ता ग्राफ शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बना

चंडीगढ़
हरियाणा में सरकारी स्कूलों में ड्रॉप आउट बच्चों का बढ़ता ग्राफ शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। नए शैक्षणिक सत्र में शिक्षा विभाग ने 100 प्रतिशत ड्रॉप आउट बच्चों को वापस लाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में पढ़ाई बीच में छोड़ चुके सभी 34 हजार बच्चों को फिर से स्कूल में दाखिल कराने में शिक्षकों के पसीने छूट रहे हैं। प्रवेश उत्सव के तहत शिक्षक गांव, वार्ड व गली-मोहल्ले में पहुंचकर ड्रॉप आउट बच्चों को ढूंढ़ रहे हैं। शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों को उन बच्चों की सूची थमाई गई है, जो स्कूल छोड़ चुके हैं।

15 अप्रैल तक निदेशालय को रिपोर्ट भेजनी होगी
जनवरी के शीतकालीन अवकाश के दौरान विभाग द्वारा सर्वेक्षण के जरिये स्कूल छोड़ चुके बच्चों का डाटा जुटाया गया था। अधर में पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों की सूची प्राबधान पोर्टल पर भी जिलावार अपलोड की गई है। शिक्षा निदेशक की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं कि शिक्षकों द्वारा स्कूलों से वंचित क्षेत्रों, निर्माण स्थलों, ईंट भट्ठों, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की अधिक आबादी वाले क्षेत्रों, बेघर बच्चों, भिखारियों, अनाथ बच्चों, प्रवासी बच्चों, विमुक्त/आदिम जनजातीय समूहों को 100 प्रतिशत कवरेज किया जाएगा। 15 अप्रैल तक जिलावार निदेशालय को रिपोर्ट भेजनी होगी।

स्थानांतरण प्रक्रिया जल्द होगी शुरू
हरियाणा में जल्द ही शिक्षकाें के ऑनलाइन स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होगी। सभी पीजीटी शिक्षकों और प्रधानाचार्यों का डेटा एमआइएस पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। डेटा अपडेट होने के बाद विभाग अंतर जिला ट्रांसफर और सामान्य ट्रांसफर अभियान शुरू करेगा। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को आठ अप्रैल को शाम पांच बजे तक अनिवार्य रूप से पूर्णता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है, जिसमें पुष्टि की गई हो कि शिक्षकों के एमआइएस प्रोफाइल अपडेट के लिए कोई मामला लंबित नहीं है।

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